कुछ कहना मुश्किल तो है ....
क्यों किसी की ज़िन्दगी कभी कभी,
इतनी मजबूर तो जाती है
की खुद को दूसरो से छुपाना पड़ता है,
ना चाहते हुए भी ये जाताना पड़ता है,
की खुश है हम और हसकर मुस्कुराना पड़ता है.....
मैंने कभी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया,
हर वक़्त खुद को एक झूठ की चादर में उढ़ा दिया,
न जाने कब उन यादों को दफ़न कर पाऊँगी,
जिसने न मुझे चैन से जीने दिया और ना ही मरने दिया……
डरती हूँ कही ये राज ना खुल जाए,
मेरे पैरो तले ये ज़मीन न खिसक जाए,
चुप हूँ अगर मैं तो कोई वजह होगी,
वरना कही ये किसी की ज़िन्दगी का तूफ़ान न बन जाए ……।