औरत एक प्रश्न
कुछ तो लोग कहेंगे , लोगो का काम है कहना,
पर तुम कभी भी इन दायरो में ना रहना,
करना वही जो तुम्हे अछा लगे,
क्योकि ये दुनिया है मर्दों की ,
इससे छुपकर ना रहना।
औरत के रूप अनेक,
पर इससे कोई समझ ना पाया,
एक जमाना था, जब औरतों को समझाता था देवी,
आजकल तो बस, बनकर रह गयी है किसी की बीवी,
ना एहसास उसके आँसुओं का और ना उसके दुःख दर्द का ,
रौंद कर, गला दबाया जाता है हर पल उसके अरमानो का ,
कैसी ये दुनिया, कैसा ये समाज,
जिसमे लड़कियों को, बोझ समझा जाता है आज..
जहां बनी किरण बेदी आई.पी .एस ऑफिसर,
कल्पना पहुँच गयी चाँद पर ,
दिन बदले, हालात बदला ,
पर बदला ना यहाँ का राज,
कैसी ये दुनिया, कैसा ये समाज।
हम लड़कियां है, इस बात पर गम नहीं करना है,
खुद में लानी है ताकत, उठकर सबको जवाब देना है,
जितना सहना था, सह चुके हम,
अब कुछ करना होगा, नहीं डरेंगे हम,
कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना,
पर तुम कभी भी इन दायरो में ना रहना।